Новый президент Украины Владимир Зеленский подписал указ о досрочном прекращении полномочий Верховной рады и проведении внеочередных выборов 21 июля 2019 года. О намерении распустить Раду Зеленский объявил накануне во время своей инаугурационной речи в парламенте.
"Прекратить досрочно полномочия Верховной рады Украины восьмого созыва… Назначить внеочередные выборы в Верховную раду Украины на 21 июля 2019 года", - говорится в тексте указа, опубликованного на сайте президента Украины. Указ вступает в силу со дня опубликования.
Ранее во вторник Зеленский провел встречу с руководством Рады и лидерами парламентских фракций, после которой заявил, что внеочередные парламентские выборы необходимы из-за низкого уровня доверия граждан и фактического отсутствия коалиции с 2016 года.
"Главным аргументом для роспуска Верховной рады является очень низкое доверие граждан Украины к этому институту - 4%. Это - оценка работы парламента и самый весомый аргумент для прекращения его полномочий. Я, как гарант Конституции, обязан гарантировать права граждан Украины. Юридическое основание для роспуска - с 2016 года не существовало коалиции", - сказал он.
Юридический советник Зеленского Андрей Богдан после завершения встречи заявил, что команда президента считает наиболее приемлемой датой досрочных выборов 21 июля. Вечером во вторник Зеленский подписал указ о назначении Богдана главой президентской администрации.
Действующий состав Верховной рады Украины был избран пять лет назад. Очередные выборы в парламент должны были состояться 27 октября 2019 года.
Первым делом - роспуск Рады
В понедельник, 20 мая, в Киеве состоялась инаугурация Владимира Зеленского, одержавшего победу на президентских выборах в апреле. Вступив в должность, он заявил, что первый его указ будет о роспуске Верховной рады.
"Я распускаю Верховную раду восьмого созыва. Слава Украине!" - сказал Зеленский, обращаясь к народу Украины, после того, как принес присягу.
СМИ и эксперты ожидали, что сразу после инаугурации Зеленский объявит о роспуске Рады. По их мнению, досрочные выборы выгодны ему, поскольку у него самого и его партии "Слуга народа" высокий рейтинг. К октябрю, когда должны были пройти выборы в парламент, рейтинг мог снизиться.
Противники роспуска Рады указывали, что Зеленский не имеет права этого делать, после того как на прошлой неделе из парламентской коалиции вышел "Народный фронт". В команде Зеленского же считают, что коалиция распалась еще несколько лет назад.
На протяжении последних месяцев фракции коалиции - "Блок Петра Порошенко" и "Народный фронт" - суммарно насчитывали в своих рядах менее необходимого количества депутатов. Все решения принимались ими при поддержке фракций, номинально не входящих в большинство, или внефракционных депутатов.
Во вторник вечером он написал в "Фейсбуке": "Печально и тревожно, что гарант конституции Украины начинает свою деятельность в должности с грубого нарушения Конституции. Плохой знак".
Верховная рада не может быть распущена на протяжении последних полугода своих полномочий. Поэтому для команды Зеленского было важно, чтобы инаугурация была назначена до 27 мая.
Как пройдут выборы
Согласно действующему законодательству, парламентские выборы должны пройти по смешанной избирательной системе. Половину из 450 депутатов должны избрать в одномандатных округах, половину - по партийным спискам с пятипроцентным избирательным барьером.
На консультациях с депутатами во вторник Зеленский выступил с инициативой срочного внесения изменений в закон о выборах. Он собирается предложить Раде отказаться от мажоритарной составляющей выборов и избрать весь состав парламента по системе партийных списков, снизив при этом проходной барьер до 3%.
По словам Богдана, письмо в адрес спикера Парубия с просьбой созыва внеочередного заседания Рады 22 мая для внесения этих изменений может быть направлено уже во вторник. Парубий должен созвать такое заседание в трехдневный срок.
Во вторник Зеленский также подписал указы об увольнении начальника генштаба вооруженных сил Украины Виктора Муженко и назначении на эту должность Руслана Хомчака.
Муженко возглавил генштаб в июле 2014 года. В инаугурационной речи новый президент говорил, что одной из главных его задач станет прекращение боевых действий в Донбассе.
"Не мы начали эту войну, но нам эту войну заканчивать. И мы готовы к диалогу. Но я уверен, что первым шагом для начала этого диалога станет возвращение всех украинских пленных", - говорил он.
Во время инаугурации Зеленский также призвал уйти со своих постов членов кабинета министров.
"Я не понимаю наше правительство, которое только разводит руками и говорит мне, что мы не сможем сделать. Это неправда - можете, вы можете взять бумагу, взять ручку и освободить свои места для тех, кто будет думать о следующих поколениях, а не о следующих выборах", - заявил он.
После инаугурации премьер-министр Украины Владимир Гройсман заявил, что подаст в отставку в среду, 22 мая. "Президент Зеленский призывом об отставке правительства взял на себя всю ответственность за будущие вызовы", - сказал он. Отставка Гройсмана означает отставку всего правительства.
17 мая, еще до инаугурации Зеленского, о сложении полномочий заявили глава МИД Украины Павел Климкин и секретарь Совета национальной безопасности и обороны (СНБО) Александр Турчинов.
Wednesday, May 22, 2019
Thursday, April 25, 2019
नेटवर्क बनाने से डरते हैं तो ये हैं तरीके
दोस्त और परिवार के लोग चाहे जितने अच्छे हों, यह ज़रूरी नहीं कि जिन्हें आप पहले से जानते हैं वे कोई अच्छी नौकरी या कोई बड़ा काम दिलाने में आपकी मदद करें.
इसलिए हमें अपने परिचित दायरे से बाहर के लोगों से संपर्क बनाना पड़ता है.
बहुत सारे व्यक्तियों के संपर्क में रहने वाले कुछ बहिर्मुखी लोगों को भी इस तरह पेशेवर संपर्क बनाना अच्छा नहीं लगता.
जिस तरह की नेटवर्किंग के बारे में हम बात कर रहे हैं वह अंतर्मुखी या एकाकी लोगों के लिए ख़ास तौर पर चुनौतियों से भरा हो सकता है.
ज़रुरी बैठकों, भोजन या कॉफी पर किसी से मुलाकात करने में उनको भारी परेशानी हो सकती है.
नेटवर्किंग का एक दूसरा रूप भी है जिसे आप अपने तरीके से और अपनी रफ़्तार से कर सकते हैं. मैं इसे "लूज़ टच" कहती हूं.
यह संपर्क बनाने और उसे बचाए रखने को लेकर आपकी सोच को पूरी तरह बदल सकता है.
आप जितने लोगों के बारे में सोचते हैं असल में उससे कहीं ज़्यादा लोगों को जानते हैं, क्योंकि कई लोगों से आपके "ढीले रिश्ते" होते हैं.
ये वैसे संपर्क होते हैं जिनके बारे में आप बस थोड़ा जानते हैं और शायद उनके बारे में कभी सोचते नहीं.
हो सकता है कि आप आते-जाते कहीं उनसे मिलते हों या कुछ दिनों के लिए साथ में काम किया है.
यह भी हो सकता है कि आपने किसी क्लास या कांफ्रेंस में एक साथ हिस्सा लिया हो.
वे आपके दोस्तों के दोस्त भी हो सकते हैं, पूर्व सहयोगी या स्कूल के साथी भी हो सकते हैं.
आम तौर पर आप उनके संपर्क में नहीं होते. लेकिन आपके नेटवर्क पर उनका बड़ा असर हो सकता है.
70 के दशक में हुए एक समाजशास्त्रीय अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों के साथ आपके प्रत्यक्ष या मज़बूत संबंध नहीं होते उनके अलग सामाजिक दायरों में रहने और अलग तरह की सूचनाओं तक उनकी पहुंच होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
इसलिए अगर हम नये विचारों, सुरागों या परिचय की तलाश कर रहे हों तो अपने सामान्य दायरे से बाहर निकलने पर क़ामयाबी की संभावना बढ़ जाती है.
मैं एक उदाहरण देती हूं. वर्षों पहले मैं एक क्रिएटिव एजेंसी की छोटी टीम का हिस्सा थी. पिछले साल मैं उन दिनों की एक डिजाइनर से मिली.
हम एक-दूसरे के बहुत करीब नहीं थे, लेकिन पुरानी पहचान पर भरोसा करके उसने मुझे बताया कि वह नई नौकरी की तलाश में है.
उसे नेटवर्क बनाना पसंद नहीं था और वह यह भी नहीं समझ पा रही थी कि वह किससे मदद मांगे.
मैंने उसे याद दिलाया कि उसे नये सिरे से शुरुआत नहीं करनी है. मैंने उसे हमारे पुराने समूह के कुछ नाम बताए, जिससे उसका चेहरा खिल उठा.
ये वे लोग थे जिन्हें वह पसंद करती थी. उन सबको संपर्क में रहने का नोट भेजने में उसे कोई आपत्ति नहीं थी.
कुछ महीनों बाद मैं उससे दोबारा मिली तो वह कुछ पुराने (और अब मौजूदा) सहयोगियों के साथ नये प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी.
मुझे उम्मीद है कि अब उसने अपने पूर्व सहयोगियों के साथ लूज़ टच में रहने की आदत बना ली होगी.
अगली बार यदि उसे कोई ज़रूरत होगी तो वह उन लोगों से संपर्क करने में नहीं हिचकेगी, जो मदद करने के लिए तैयार हैं.
बिज़नेस प्रोफेसर डेविड बर्कस ने अपनी नई किताब "फ्रेंड ऑफ़ ए फ्रेंड" में इस बात पर ज़ोर दिया है कि जिन लोगों को आप पहले से जानते हैं वे आपकी मदद करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं.
शर्मीले लोगों को शायद यह बात अच्छी लगे, लेकिन यह नेटवर्क बढ़ाने की उनकी कोशिशों को रोक सकता है.
बर्कस कहते हैं, "जब हमारे करियर को झटका लगता है तब हम करीबी मित्रों को ही इसके बारे में बताते हैं. वे हमारी मदद करने में सक्षम हो सकते हैं या नहीं भी हो सकते हैं."
"इसकी जगह हमें उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जिनसे हमारे नजदीकी रिश्ते न हो. उनको अपने बारे में बताएं और देखें कि उनके पास क्या मौके हैं."
इससे भी बेहतर यह है कि हम ऐसे निष्क्रिय संबंधों को फिर से सक्रिय करने का नियमित अभ्यास शुरू करें.
दूसरे शब्दों में, आपको सामाजिक तितली होने की ज़रूरत नहीं है जो लंबी-लंबी बैठकें करे और संपर्क बढ़ाए. आपको बस अपने संबंधों को बचाए रखना है.
"लूज़ टच" में रहने का यही मतलब है. इसी तरीके से मैं वर्षों पहले मिले लोगों ढेरों लोगों से जुड़ी हुई हूं.
यदि हम ट्विटर, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम पर पहले से जुड़े हों तो मैं उन्हें प्राइवेट मैसेज़ भी भेज सकती हूं.
उसमें कोई न्यूज़ स्टोरी भी हो सकती है जिसमें उनकी रुचि हो सकती है. मैं कोई वीडियो, कार्टून या छोटा अभिवादन भी भेज सकती हूं (जैसे- क्या चल रहा है? क्या नया-ताज़ा है?).
इसलिए हमें अपने परिचित दायरे से बाहर के लोगों से संपर्क बनाना पड़ता है.
बहुत सारे व्यक्तियों के संपर्क में रहने वाले कुछ बहिर्मुखी लोगों को भी इस तरह पेशेवर संपर्क बनाना अच्छा नहीं लगता.
जिस तरह की नेटवर्किंग के बारे में हम बात कर रहे हैं वह अंतर्मुखी या एकाकी लोगों के लिए ख़ास तौर पर चुनौतियों से भरा हो सकता है.
ज़रुरी बैठकों, भोजन या कॉफी पर किसी से मुलाकात करने में उनको भारी परेशानी हो सकती है.
नेटवर्किंग का एक दूसरा रूप भी है जिसे आप अपने तरीके से और अपनी रफ़्तार से कर सकते हैं. मैं इसे "लूज़ टच" कहती हूं.
यह संपर्क बनाने और उसे बचाए रखने को लेकर आपकी सोच को पूरी तरह बदल सकता है.
आप जितने लोगों के बारे में सोचते हैं असल में उससे कहीं ज़्यादा लोगों को जानते हैं, क्योंकि कई लोगों से आपके "ढीले रिश्ते" होते हैं.
ये वैसे संपर्क होते हैं जिनके बारे में आप बस थोड़ा जानते हैं और शायद उनके बारे में कभी सोचते नहीं.
हो सकता है कि आप आते-जाते कहीं उनसे मिलते हों या कुछ दिनों के लिए साथ में काम किया है.
यह भी हो सकता है कि आपने किसी क्लास या कांफ्रेंस में एक साथ हिस्सा लिया हो.
वे आपके दोस्तों के दोस्त भी हो सकते हैं, पूर्व सहयोगी या स्कूल के साथी भी हो सकते हैं.
आम तौर पर आप उनके संपर्क में नहीं होते. लेकिन आपके नेटवर्क पर उनका बड़ा असर हो सकता है.
70 के दशक में हुए एक समाजशास्त्रीय अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों के साथ आपके प्रत्यक्ष या मज़बूत संबंध नहीं होते उनके अलग सामाजिक दायरों में रहने और अलग तरह की सूचनाओं तक उनकी पहुंच होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
इसलिए अगर हम नये विचारों, सुरागों या परिचय की तलाश कर रहे हों तो अपने सामान्य दायरे से बाहर निकलने पर क़ामयाबी की संभावना बढ़ जाती है.
मैं एक उदाहरण देती हूं. वर्षों पहले मैं एक क्रिएटिव एजेंसी की छोटी टीम का हिस्सा थी. पिछले साल मैं उन दिनों की एक डिजाइनर से मिली.
हम एक-दूसरे के बहुत करीब नहीं थे, लेकिन पुरानी पहचान पर भरोसा करके उसने मुझे बताया कि वह नई नौकरी की तलाश में है.
उसे नेटवर्क बनाना पसंद नहीं था और वह यह भी नहीं समझ पा रही थी कि वह किससे मदद मांगे.
मैंने उसे याद दिलाया कि उसे नये सिरे से शुरुआत नहीं करनी है. मैंने उसे हमारे पुराने समूह के कुछ नाम बताए, जिससे उसका चेहरा खिल उठा.
ये वे लोग थे जिन्हें वह पसंद करती थी. उन सबको संपर्क में रहने का नोट भेजने में उसे कोई आपत्ति नहीं थी.
कुछ महीनों बाद मैं उससे दोबारा मिली तो वह कुछ पुराने (और अब मौजूदा) सहयोगियों के साथ नये प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी.
मुझे उम्मीद है कि अब उसने अपने पूर्व सहयोगियों के साथ लूज़ टच में रहने की आदत बना ली होगी.
अगली बार यदि उसे कोई ज़रूरत होगी तो वह उन लोगों से संपर्क करने में नहीं हिचकेगी, जो मदद करने के लिए तैयार हैं.
बिज़नेस प्रोफेसर डेविड बर्कस ने अपनी नई किताब "फ्रेंड ऑफ़ ए फ्रेंड" में इस बात पर ज़ोर दिया है कि जिन लोगों को आप पहले से जानते हैं वे आपकी मदद करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं.
शर्मीले लोगों को शायद यह बात अच्छी लगे, लेकिन यह नेटवर्क बढ़ाने की उनकी कोशिशों को रोक सकता है.
बर्कस कहते हैं, "जब हमारे करियर को झटका लगता है तब हम करीबी मित्रों को ही इसके बारे में बताते हैं. वे हमारी मदद करने में सक्षम हो सकते हैं या नहीं भी हो सकते हैं."
"इसकी जगह हमें उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जिनसे हमारे नजदीकी रिश्ते न हो. उनको अपने बारे में बताएं और देखें कि उनके पास क्या मौके हैं."
इससे भी बेहतर यह है कि हम ऐसे निष्क्रिय संबंधों को फिर से सक्रिय करने का नियमित अभ्यास शुरू करें.
दूसरे शब्दों में, आपको सामाजिक तितली होने की ज़रूरत नहीं है जो लंबी-लंबी बैठकें करे और संपर्क बढ़ाए. आपको बस अपने संबंधों को बचाए रखना है.
"लूज़ टच" में रहने का यही मतलब है. इसी तरीके से मैं वर्षों पहले मिले लोगों ढेरों लोगों से जुड़ी हुई हूं.
यदि हम ट्विटर, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम पर पहले से जुड़े हों तो मैं उन्हें प्राइवेट मैसेज़ भी भेज सकती हूं.
उसमें कोई न्यूज़ स्टोरी भी हो सकती है जिसमें उनकी रुचि हो सकती है. मैं कोई वीडियो, कार्टून या छोटा अभिवादन भी भेज सकती हूं (जैसे- क्या चल रहा है? क्या नया-ताज़ा है?).
Thursday, April 11, 2019
श्याओमी के फाउंडर बोनस में मिले 6631 करोड़ रुपए के शेयर दान करेंगे
बीजिंग. स्मार्टफोन कंपनी श्याओमी के फाउंडर और सीईओ ले जुन (49) को 96.1 करोड़ डॉलर (6,631 करोड़ रुपए) की वैल्यू के 63.66 करोड़ शेयर बोनस में मिले हैं। कंपनी में जुन के योगदान के लिए उन्हें यह बोनस दिया गया है। जुन सारे शेयरों को दान करेंगे। कंपनी ने बुधवार को रेग्युलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी। हालांकि, यह नहीं बताया कि दान किसे दिया जाएगा।
पिछले साल हॉन्गकॉन्ग में लिस्ट हुआ था श्याओमी का शेयर
चीन में पिछले साल स्मार्टफोन की बिक्री घटने की वजह से श्याओमी के शेयर की कीमत में कमी आई है। उसे सैमसंग, एपल, हुवावे, ओप्पो और वीवो से कॉम्पिटीशन का सामना भी करना पड़ रहा है। 10 साल पुरानी कंपनी श्याओमी का शेयर पिछले साल जुलाई में हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार में लिस्ट हुआ था।
श्याओमी के शेयर में गिरावट के बावजूद जुन की मौजूदा नेटवर्थ 11 अरब डॉलर (75,900 करोड़ रुपए) है। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक दुनिया के 500 अरबपतियों की लिस्ट में उनका 126वां नंबर है।
रिसर्च फर्म आईडीसी के मुताबिक 2018 में श्याओमी दुनिया की चौथी बड़ी स्मार्टफोन कंपनी थी। पिछले साल कंपनी की हैंडसेट डिलीवरी ग्रोथ 32.2% रही।
मार्च 2018 से असांजे का इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया गया था। इसका कारण असांजे के द्वारा किया गया वादा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह बाकी देशों से रिश्तों को लेकर कोई मैसेज नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। असांजे ने विकीलीक्स की वेबसाइट पर इराक युद्ध से जुड़े चार लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसके जरिए उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड और नाटों की सेनाओं पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया था। असांजे पर यह भी आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूसी खुफिया एजेंसियाें ने हिलेरी क्लिंटन के कैम्पेन से जुड़े ईमेल हैक कर उन्हें विकीलीक्स को दे दिया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
पिछले साल हॉन्गकॉन्ग में लिस्ट हुआ था श्याओमी का शेयर
चीन में पिछले साल स्मार्टफोन की बिक्री घटने की वजह से श्याओमी के शेयर की कीमत में कमी आई है। उसे सैमसंग, एपल, हुवावे, ओप्पो और वीवो से कॉम्पिटीशन का सामना भी करना पड़ रहा है। 10 साल पुरानी कंपनी श्याओमी का शेयर पिछले साल जुलाई में हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार में लिस्ट हुआ था।
श्याओमी के शेयर में गिरावट के बावजूद जुन की मौजूदा नेटवर्थ 11 अरब डॉलर (75,900 करोड़ रुपए) है। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक दुनिया के 500 अरबपतियों की लिस्ट में उनका 126वां नंबर है।
रिसर्च फर्म आईडीसी के मुताबिक 2018 में श्याओमी दुनिया की चौथी बड़ी स्मार्टफोन कंपनी थी। पिछले साल कंपनी की हैंडसेट डिलीवरी ग्रोथ 32.2% रही।
मार्च 2018 से असांजे का इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया गया था। इसका कारण असांजे के द्वारा किया गया वादा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह बाकी देशों से रिश्तों को लेकर कोई मैसेज नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। असांजे ने विकीलीक्स की वेबसाइट पर इराक युद्ध से जुड़े चार लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसके जरिए उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड और नाटों की सेनाओं पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया था। असांजे पर यह भी आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूसी खुफिया एजेंसियाें ने हिलेरी क्लिंटन के कैम्पेन से जुड़े ईमेल हैक कर उन्हें विकीलीक्स को दे दिया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
Wednesday, April 3, 2019
कौओं को खदेड़ती है बाजों-उल्लुओं की टीम, ताकि वे राष्ट्रपति भवन को नुकसान न पहुंचाएं
मास्को. रूस में राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन और उसके आसपास की प्रमुख इमारतों की कौओं से हिफाजत करने के लिए रक्षा विभाग ने बाजों और उल्लुओं की टीम बनाई है। परिंदों की यह यूनिट 1984 में बनाई गई थी। अभी इसमें 10 से ज्यादा बाज और उल्लू हैं। उन्हें इसके लिए खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है।
कौओं को देखते ही झपट पड़ते हैं
इस टीम में 20 साल की एक मादा बाज अल्फा और उसका साथी फाइल्या उल्लू है। ये कौओं की आवाज सुन लें या उन्हें आसमान में मंडराते देख लें तो चंद मिनटों में उन पर झपट पड़ते हैं। इन परिंदों के दल की देखरेख करने वाली टीम में शामिल 28 साल के एलेक्स वालासोव कहते हैं, ‘‘इसके पीछे मकसद सिर्फ कौओं से छुटकारा पाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें इमारतों से दूर रखना है ताकि वे यहां अपना घोंसला न बना सकें।’’
कौओं के मल-मूत्र से गुंबदों का क्षरण हो रहा था
वालासोव का कहना है, ‘‘कौए कई तरह की घातक बीमारियां फैलाते हैं। इनके बैठने और मल-मूत्र से क्रेमलिन के सुनहरे गुंबदों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा था। ये यहां फूलों क्यारियों को भी नुकसान पहुंचाते थे। ऐसे में क्रेमलिन के सुरक्षाकर्मियों के लिए इनकी गंदगी साफ करने से ज्यादा आसान इन्हें खदेड़ना था।’’
सब तरकीबें नाकाम हुईं तब यहां शिकारी पक्षी बसाए गए
इमारतों की देखरेख करने वाली टीम के सुपरिटेंडेंट रहे पावेल माल्कोव का कहना है- सोवियत संघ के शुुरुआती दौर में क्रेमलिन और उसकी आसपास की इमारतों की रक्षा के लिए कौओं को मार गिराने वाले गार्ड रखे गए। कौओं को डराने के लिए शिकारी पक्षियों की रिकॉर्ड की गई आवाज का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन ये तरकीबें कारगर साबित नहीं हुईं। माल्कोव बताते हैं कि इसके बाद यहां शिकारी पक्षियों को ही बसाने का फैसला किया। अब रक्षा विभाग की टीम में शामिल इन पक्षियों का दल यहां स्थायी रूप से रहता है।
बाज और उल्लू ही क्यों?
वालासोव का कहना है कि हर पक्षी के शिकार करने का अलग तरीका होता है। गोशाक्स (बाज की एक प्रजाति) बेहद तेज उड़ता है। कम दूरियों के लिए यह बहुत तेज है। उससे सामने आए कौए के बचने के बहुत कम मौके रहते हैं। वहीं, फाइल्या उल्लू के प्रशिक्षक डेनिस सिडोगिन बताते हैं कि वह रात में शिकार के लिए मुफीद है। यह बिल्कुल शांत रहकर शिकार करता है। कौओं से मुकाबले के लिए वह अकेला ही काफी है। वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों के साथ अपनी गर्दन को 180 डिग्री तक घुमा सकता है और अपनी जगह पर बैठे-बैठे ही पीछे देख सकता है।
क्रेमलिन के गार्ड्स का कहना है कि दुनियाभर में सशस्त्रबलों में पक्षियों की यूनिट का इस्तेमाल करती हैं। इन्हें कीट-पतंगों को डराने के लिए यहां तक की ड्रोन को मार गिराने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, क्रेमलिन की सुरक्षा में तैनात पक्षियों का इस्तेमाल ड्रोन गिराने में नहीं किया जाता, क्योंकि इसके लिए अब कई तरह की आधुनिक तकनीक मौजूद हैं।
कौओं को देखते ही झपट पड़ते हैं
इस टीम में 20 साल की एक मादा बाज अल्फा और उसका साथी फाइल्या उल्लू है। ये कौओं की आवाज सुन लें या उन्हें आसमान में मंडराते देख लें तो चंद मिनटों में उन पर झपट पड़ते हैं। इन परिंदों के दल की देखरेख करने वाली टीम में शामिल 28 साल के एलेक्स वालासोव कहते हैं, ‘‘इसके पीछे मकसद सिर्फ कौओं से छुटकारा पाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें इमारतों से दूर रखना है ताकि वे यहां अपना घोंसला न बना सकें।’’
कौओं के मल-मूत्र से गुंबदों का क्षरण हो रहा था
वालासोव का कहना है, ‘‘कौए कई तरह की घातक बीमारियां फैलाते हैं। इनके बैठने और मल-मूत्र से क्रेमलिन के सुनहरे गुंबदों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा था। ये यहां फूलों क्यारियों को भी नुकसान पहुंचाते थे। ऐसे में क्रेमलिन के सुरक्षाकर्मियों के लिए इनकी गंदगी साफ करने से ज्यादा आसान इन्हें खदेड़ना था।’’
सब तरकीबें नाकाम हुईं तब यहां शिकारी पक्षी बसाए गए
इमारतों की देखरेख करने वाली टीम के सुपरिटेंडेंट रहे पावेल माल्कोव का कहना है- सोवियत संघ के शुुरुआती दौर में क्रेमलिन और उसकी आसपास की इमारतों की रक्षा के लिए कौओं को मार गिराने वाले गार्ड रखे गए। कौओं को डराने के लिए शिकारी पक्षियों की रिकॉर्ड की गई आवाज का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन ये तरकीबें कारगर साबित नहीं हुईं। माल्कोव बताते हैं कि इसके बाद यहां शिकारी पक्षियों को ही बसाने का फैसला किया। अब रक्षा विभाग की टीम में शामिल इन पक्षियों का दल यहां स्थायी रूप से रहता है।
बाज और उल्लू ही क्यों?
वालासोव का कहना है कि हर पक्षी के शिकार करने का अलग तरीका होता है। गोशाक्स (बाज की एक प्रजाति) बेहद तेज उड़ता है। कम दूरियों के लिए यह बहुत तेज है। उससे सामने आए कौए के बचने के बहुत कम मौके रहते हैं। वहीं, फाइल्या उल्लू के प्रशिक्षक डेनिस सिडोगिन बताते हैं कि वह रात में शिकार के लिए मुफीद है। यह बिल्कुल शांत रहकर शिकार करता है। कौओं से मुकाबले के लिए वह अकेला ही काफी है। वह अपनी बड़ी-बड़ी आंखों के साथ अपनी गर्दन को 180 डिग्री तक घुमा सकता है और अपनी जगह पर बैठे-बैठे ही पीछे देख सकता है।
क्रेमलिन के गार्ड्स का कहना है कि दुनियाभर में सशस्त्रबलों में पक्षियों की यूनिट का इस्तेमाल करती हैं। इन्हें कीट-पतंगों को डराने के लिए यहां तक की ड्रोन को मार गिराने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, क्रेमलिन की सुरक्षा में तैनात पक्षियों का इस्तेमाल ड्रोन गिराने में नहीं किया जाता, क्योंकि इसके लिए अब कई तरह की आधुनिक तकनीक मौजूद हैं।
Thursday, March 21, 2019
मेरठः इनकम टैक्स कमिश्नर प्रीता ने छोड़ी नौकरी, ज्वॉइन की कांग्रेस
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल कमिश्नर प्रीता हरित ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हरित ने प्रिंसिपल इनकम टैक्स कमिश्नर पद से इस्तीफा देने के बाद बुधवार को कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन किया. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के चीफ राज बब्बर ने प्रीता हरित को पार्टी में शामिल कराया. प्रीता हरित उत्तर प्रदेश के मेरठ में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में बतौर प्रिंसपल कमिश्नर तैनात थीं.
प्रीता हरित का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. बहुजन सम्यक संगठन की संस्थापक हरित का जन्म हरियाणा के पलवल में हुआ था. उन्होंने 22 साल की उम्र में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली थी. प्रीता हरित ने कांग्रेस पार्टी उस समय ज्वाइन की है, जब लोकसभा चुनाव के लिए सियासी घमासान जारी है.
इससे पहले 10 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था. इसके तरह उत्तर प्रदेश में सभी सात चरणों में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे. पहले चरण के लिए 11 अप्रैल और आखिरी चरण के लिए 19 मई को मतदान होंगे. इसके बाद 23 मई को एक साथ चुनाव के नतीजे आएंगे. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे हैं.
आपको बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा एनडीए में बीजेपी की सहयोगी अपना दल ने भी दो सीटें जीती थी. उत्तर प्रदेश में मिली शानदार जीत के दम पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाई थी. हालांकि इस बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गठबंधन किया है. हालांकि इस गठबंधन में अभी तक कांग्रेस शामिल नहीं हुई है. पहले यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन से कांग्रेस को दूर रखा गया था, लेकिन जब कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव मैदान में उतारा, तो पूरा सियासी गणित ही बदल गया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का महासचिव बनाया है. साथ ही उत्तर प्रदेश पूर्व का प्रभार सौंपा है. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव मैदान में उतरने के बाद से सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस को अपने साथ लाने की कोशिश में है. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन जितनी सीटें देना चाह रहा है, उससे कांग्रेस संतुष्ट नहीं हैं. लिहाजा कांग्रेस ने यूपी में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.
इसी कड़ी में प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ दौरे कर रही हैं. अभी उन्होंने प्रयागराज से बनारस तक बोट यात्रा की थी. इस बीच उन्होंने लोगों से भी संवाद किया और बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला. वाराणसी पहुंचकर प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा वार किया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने साल 2014 में जितने वादे किए थे, उनको पूरा नहीं किया.
प्रीता हरित का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. बहुजन सम्यक संगठन की संस्थापक हरित का जन्म हरियाणा के पलवल में हुआ था. उन्होंने 22 साल की उम्र में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली थी. प्रीता हरित ने कांग्रेस पार्टी उस समय ज्वाइन की है, जब लोकसभा चुनाव के लिए सियासी घमासान जारी है.
इससे पहले 10 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था. इसके तरह उत्तर प्रदेश में सभी सात चरणों में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे. पहले चरण के लिए 11 अप्रैल और आखिरी चरण के लिए 19 मई को मतदान होंगे. इसके बाद 23 मई को एक साथ चुनाव के नतीजे आएंगे. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे हैं.
आपको बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा एनडीए में बीजेपी की सहयोगी अपना दल ने भी दो सीटें जीती थी. उत्तर प्रदेश में मिली शानदार जीत के दम पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाई थी. हालांकि इस बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गठबंधन किया है. हालांकि इस गठबंधन में अभी तक कांग्रेस शामिल नहीं हुई है. पहले यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन से कांग्रेस को दूर रखा गया था, लेकिन जब कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव मैदान में उतारा, तो पूरा सियासी गणित ही बदल गया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का महासचिव बनाया है. साथ ही उत्तर प्रदेश पूर्व का प्रभार सौंपा है. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव मैदान में उतरने के बाद से सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस को अपने साथ लाने की कोशिश में है. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन जितनी सीटें देना चाह रहा है, उससे कांग्रेस संतुष्ट नहीं हैं. लिहाजा कांग्रेस ने यूपी में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.
इसी कड़ी में प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ दौरे कर रही हैं. अभी उन्होंने प्रयागराज से बनारस तक बोट यात्रा की थी. इस बीच उन्होंने लोगों से भी संवाद किया और बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला. वाराणसी पहुंचकर प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा वार किया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने साल 2014 में जितने वादे किए थे, उनको पूरा नहीं किया.
Thursday, March 7, 2019
पाकिस्तान में नहीं है जैश-ए-मोहम्मद, पाक सेना के प्रवक्ता: आज की पांच बड़ी खबरें
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ गफूर ने एक टेलीविज़न को दिए इंटरव्यू में कहा है कि चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान में है ही नहीं.
सीएनएन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जो कुछ भी दावा जैश ने किया है वो पाकिस्तानी सरज़मीं से नहीं किया गया है.
इससे पहले, पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर के बेटे और भाई को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद मसूद अज़हर का एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आया है जिसमें वो पाकिस्तानी अधिकारियों को कह रहे हैं कि "वो ईश्वर से डरें". ये ऑडियो क्लिप मसूद अज़हर की बताई जा रही है जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि वो अभी जीवित हैं.
पाकिस्तान सरकार ने हाल में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए इस संगठन से जुड़े 44 लोगों को हिरासत में लिया था. बताया जा रहा था कि हिरासत में लिए गए लोगों में कुछ वो लोग भी शामिल हैं जिनके नाम उस डोज़ियर में शामिल हैं जो भारत ने पुलवामा हमले के संबंध में पाकितान सरकार को सौंपा है.
बीते सप्ताह पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े नेता मसूद अज़हर पाकिस्तान में ही हैं.
उनका कहना था, "वे पाकिस्तान में ही हैं, वे बीमार हैं, वे इतने बीमार हैं कि अपने घर से बाहर भी नहीं निकल सकते. वे बहुत बीमार हैं."
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ भारत का समर्थन किया है और कहा है कि जैश ने उन्हें मारने की कोशिश की थी.
पाकिस्तान में मौजूद पत्रकार नदीम मलिक (हम टीवी) को दिए एक साक्षात्कार में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि ये वही संगठन है जिसने उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान आत्मघाती हमला कर हत्या की कोशिश की.
उन्होंने ये भी कहा कि उनके राष्ट्र प्रमुख रहते हुए भारत पर होने वाले कुछ हमलों के पीछे मसूद अज़हर के इसी संगठन का हाथ था.
उन्होंने ये भी कहा, "भारत सही कार्रवाई कर रहा है. मैंने पहले भी कहा है कि ये चरमपंथी संगठन है."
करतारपुर कॉरिडोर पर भारत पाक की मुलाक़ात
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच भारत इस बात पर सहमत हो गया है कि करतारपुर कॉरिडोर को लेकर समझौते के प्रस्तावित मसौदे पर चर्चा के लिए मार्च 14 को भारतीय अधिकारी पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे.
पाकिस्तान में मौजूद गुरुद्वारा करतारपुर साहिब तक लोग आसानी से पहुंच सकें, इसी के मद्देनज़र भारत सरकार ने ये फ़ैसला लिया है. हालांकि बताया जा रहा है कि ये बैठक आयोजन अब दिल्ली में नहीं होगा बल्कि वाघा-अटारी सीमा पर भारत की तरफ होगा.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि करतारपुर कॉरीडोर के सिलसिले में ये पहली बैठक है और सरकार गुरु नानक देव जी के 550 जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर को खोला जा सके.
केरल के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही 10वीं की बायोलॉजी की किताब में लिखा हुआ है कि विवाह पूर्व शारीरिक संबंध बनाने से एचआईवी के कीटाणु फैलते हैं.
पुस्तक के चार नंबर पाठ 'रोगों को दूर रखना' में बताया गया है कि एचआईवी 'विवाह पूर्व यौन संपर्क' के कारण भी फैल सकता है.
ये किताब राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा छापी गई है और शैक्षणिक सत्र 2015-16 से राज्य के स्कूलों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर इस बात की पुष्टि होती है कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल साइट का पुनर्निर्माण कर रहा है तो उन्हें बहुत निराशा होगी. क्योंकि पिछले साल जून में हुई पहली वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल साइट को नष्ट करने का वादा किया था.
डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की हालिया मुलाक़ात से पहले और बाद में मिसाइल साइट के पुनर्निर्माण की सैटेलाइट तस्वीरें आई थीं.
व्हाइट हाउस में संबोधित करते हुए इस मसले पर डोनल्ड ट्रंप ने कहा, "हमारे लिए वहां बहुत बड़ी समस्या है. हमें उसे सुलझाना होगा. रिश्ते अच्छे हैं. लेकिन, ऐसा हो रहा है तो मुझे बहुत निराशा होगी. यह बहुत शुरुआती रिपोर्ट है. हम देखेंगे. आखिरकार समाधान हो जाएगा."
सीएनएन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जो कुछ भी दावा जैश ने किया है वो पाकिस्तानी सरज़मीं से नहीं किया गया है.
इससे पहले, पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर के बेटे और भाई को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद मसूद अज़हर का एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आया है जिसमें वो पाकिस्तानी अधिकारियों को कह रहे हैं कि "वो ईश्वर से डरें". ये ऑडियो क्लिप मसूद अज़हर की बताई जा रही है जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि वो अभी जीवित हैं.
पाकिस्तान सरकार ने हाल में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए इस संगठन से जुड़े 44 लोगों को हिरासत में लिया था. बताया जा रहा था कि हिरासत में लिए गए लोगों में कुछ वो लोग भी शामिल हैं जिनके नाम उस डोज़ियर में शामिल हैं जो भारत ने पुलवामा हमले के संबंध में पाकितान सरकार को सौंपा है.
बीते सप्ताह पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े नेता मसूद अज़हर पाकिस्तान में ही हैं.
उनका कहना था, "वे पाकिस्तान में ही हैं, वे बीमार हैं, वे इतने बीमार हैं कि अपने घर से बाहर भी नहीं निकल सकते. वे बहुत बीमार हैं."
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ भारत का समर्थन किया है और कहा है कि जैश ने उन्हें मारने की कोशिश की थी.
पाकिस्तान में मौजूद पत्रकार नदीम मलिक (हम टीवी) को दिए एक साक्षात्कार में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि ये वही संगठन है जिसने उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान आत्मघाती हमला कर हत्या की कोशिश की.
उन्होंने ये भी कहा कि उनके राष्ट्र प्रमुख रहते हुए भारत पर होने वाले कुछ हमलों के पीछे मसूद अज़हर के इसी संगठन का हाथ था.
उन्होंने ये भी कहा, "भारत सही कार्रवाई कर रहा है. मैंने पहले भी कहा है कि ये चरमपंथी संगठन है."
करतारपुर कॉरिडोर पर भारत पाक की मुलाक़ात
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच भारत इस बात पर सहमत हो गया है कि करतारपुर कॉरिडोर को लेकर समझौते के प्रस्तावित मसौदे पर चर्चा के लिए मार्च 14 को भारतीय अधिकारी पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे.
पाकिस्तान में मौजूद गुरुद्वारा करतारपुर साहिब तक लोग आसानी से पहुंच सकें, इसी के मद्देनज़र भारत सरकार ने ये फ़ैसला लिया है. हालांकि बताया जा रहा है कि ये बैठक आयोजन अब दिल्ली में नहीं होगा बल्कि वाघा-अटारी सीमा पर भारत की तरफ होगा.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि करतारपुर कॉरीडोर के सिलसिले में ये पहली बैठक है और सरकार गुरु नानक देव जी के 550 जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर को खोला जा सके.
केरल के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही 10वीं की बायोलॉजी की किताब में लिखा हुआ है कि विवाह पूर्व शारीरिक संबंध बनाने से एचआईवी के कीटाणु फैलते हैं.
पुस्तक के चार नंबर पाठ 'रोगों को दूर रखना' में बताया गया है कि एचआईवी 'विवाह पूर्व यौन संपर्क' के कारण भी फैल सकता है.
ये किताब राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा छापी गई है और शैक्षणिक सत्र 2015-16 से राज्य के स्कूलों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर इस बात की पुष्टि होती है कि उत्तर कोरिया एक मिसाइल साइट का पुनर्निर्माण कर रहा है तो उन्हें बहुत निराशा होगी. क्योंकि पिछले साल जून में हुई पहली वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल साइट को नष्ट करने का वादा किया था.
डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की हालिया मुलाक़ात से पहले और बाद में मिसाइल साइट के पुनर्निर्माण की सैटेलाइट तस्वीरें आई थीं.
व्हाइट हाउस में संबोधित करते हुए इस मसले पर डोनल्ड ट्रंप ने कहा, "हमारे लिए वहां बहुत बड़ी समस्या है. हमें उसे सुलझाना होगा. रिश्ते अच्छे हैं. लेकिन, ऐसा हो रहा है तो मुझे बहुत निराशा होगी. यह बहुत शुरुआती रिपोर्ट है. हम देखेंगे. आखिरकार समाधान हो जाएगा."
Thursday, February 28, 2019
PAK को मिला पुलवामा पर डोजियर, भारतीय पायलट को लौटाने पर भी विचार!
पुलवामा आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के बारे तमाम सबूतों वाला भारत से भेजा गया डॉजियर पाकिस्तान को मिल गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि कर दी है. पाक विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत के गिरफ्तार पायलट के बारे में निर्णय अगले कुछ दिन में हो जाएगा. पाकिस्तानी विदेश मंत्री का कहना है कि अगर भारतीय पायलट को लौटाने से दोनों देशों में तनाव कम होता है तो वह इस पर विचार कर सकते हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मुहम्मद फैजल ने इस बात की पुष्टि की है कि पुलवामा हमले के बारे में डॉजियर गुरुवार को मिल चुका है. उन्होंने कहा कि अभी अधिकारियों ने इस डॉजियर का विश्लेषण नहीं किया है, और यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो प्रधानमंत्री इमरान खान के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में गिरफ्तार भारतीय पायलट का क्या होना है, इसके बारे में निर्णय अगले कुछ दिनों में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट 'सुरक्षित और स्वस्थ हैं.
उन्होंने कहा, 'भारत ने इस मामले को हमारे समक्ष उठाया है. हम इस बारे में अगले कुछ दिनों में निर्णय लेंगे कि उनके मामले में जेनेवा कन्वेंशन लागू होता है या नहीं, उन्हें युद्धबंदी का दर्जा दिया जाए या नहीं.'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह मानना है कि हमारी हवाई सीमा में भारतीय विमानों का घुसना हमारे 'सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला' ही है. लेकिन पाकिस्तान ने जो हवाई हमले किए वह गैर सैन्य निशानों पर था.
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात में कुछ सुधार की उम्मीद दिख रही है. वियतनाम के हनोई में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर आ रही है, दोनों के बीच जारी तनाव जल्द ही खत्म हो सकता है. अमेरिका का दावा है कि इस सब में वह मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है भारत और पाकिस्तान की तरफ से एक अच्छी खबर आ रही है, दोनों देशों में पिछले काफी समय से तनाव जारी है. हम इस मसले को सुलझाने में हम मध्यस्थता कर रहे हैं, हमें अच्छी खबरें मिल रही हैं. हमें उम्मीद है कि सदियों से चल रहा ये तनाव अब जल्द ही खत्म होगा.
गत 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकी अड्डों पर एयर स्ट्राइक किया था. भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को तबाह किया था. भारत की इस स्ट्राइक से पाकिस्तान के बालाकोट में भारी नुकसान हुआ था. जिसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने बुधवार को भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन किया था. हालांकि, भारत ने पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ दिया और उसके एक F16 को ध्वस्त कर दिया.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मुहम्मद फैजल ने इस बात की पुष्टि की है कि पुलवामा हमले के बारे में डॉजियर गुरुवार को मिल चुका है. उन्होंने कहा कि अभी अधिकारियों ने इस डॉजियर का विश्लेषण नहीं किया है, और यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो प्रधानमंत्री इमरान खान के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में गिरफ्तार भारतीय पायलट का क्या होना है, इसके बारे में निर्णय अगले कुछ दिनों में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट 'सुरक्षित और स्वस्थ हैं.
उन्होंने कहा, 'भारत ने इस मामले को हमारे समक्ष उठाया है. हम इस बारे में अगले कुछ दिनों में निर्णय लेंगे कि उनके मामले में जेनेवा कन्वेंशन लागू होता है या नहीं, उन्हें युद्धबंदी का दर्जा दिया जाए या नहीं.'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह मानना है कि हमारी हवाई सीमा में भारतीय विमानों का घुसना हमारे 'सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला' ही है. लेकिन पाकिस्तान ने जो हवाई हमले किए वह गैर सैन्य निशानों पर था.
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात में कुछ सुधार की उम्मीद दिख रही है. वियतनाम के हनोई में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर आ रही है, दोनों के बीच जारी तनाव जल्द ही खत्म हो सकता है. अमेरिका का दावा है कि इस सब में वह मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगता है भारत और पाकिस्तान की तरफ से एक अच्छी खबर आ रही है, दोनों देशों में पिछले काफी समय से तनाव जारी है. हम इस मसले को सुलझाने में हम मध्यस्थता कर रहे हैं, हमें अच्छी खबरें मिल रही हैं. हमें उम्मीद है कि सदियों से चल रहा ये तनाव अब जल्द ही खत्म होगा.
गत 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकी अड्डों पर एयर स्ट्राइक किया था. भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को तबाह किया था. भारत की इस स्ट्राइक से पाकिस्तान के बालाकोट में भारी नुकसान हुआ था. जिसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने बुधवार को भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन किया था. हालांकि, भारत ने पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ दिया और उसके एक F16 को ध्वस्त कर दिया.
Subscribe to:
Comments (Atom)
台湾小学男生担心粉红口罩引发的性别教育讨论
台湾政府在肺炎疫情期间实施口罩统一 香港自去年 色情性&肛交集合 爆发“反送中 色情性&肛交集合 ”抗议后政府首次有问责官员 色情性&肛交集合 人事调动,政制及内地事务局局 色情性&肛交集合 长聂德权被平调 色情性&肛交集合 接替罗智光出任 色情性&肛交集合 公务员事务局...
-
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच कुछ दिनों पहले हुए गठबंधन के बाद से लगातार भारतीय जनता पार्टी (बीज...
-
香港警察因其公正、廉洁、为民服务的形象深入人心 ,曾被誉为亚洲最具专业、最精良的纪律部队。而现在,他们的代名字是“黑警”,在最近香港“反送中”示威现场都能听到普通市民指责其为“黑社会”、“知法犯法”。 从6月初爆发反《逃犯条例》修例运动以来,警民冲突愈演愈烈。警察执法的问题也...
-
中美贸易战日趋白热化,作为两国主要海运通道的巴拿马运河,大 量满载中美商品的巨型货轮正从通行运河的排班表中消失。运河第二大用户中国排名由仅次于美国的第二位滑至第三,美国仍然稳居榜首。 巴拿马新总统劳伦蒂诺‧科尔蒂索(Laurentino Cortizo)7月1日宣誓就职,20...